एक नए अध्ययन के अनुसार, 2025 में 1.5 लाख फर्जी एआई उद्धरण वैज्ञानिक रिकॉर्ड में शामिल हो गए। यह एक गंभीर समस्या है जो वैज्ञानिक अनुसंधान की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। अध्ययन में पाया गया कि ये फर्जी उद्धरण विभिन्न वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए थे। अध्ययन के लेखकों ने यह भी पाया कि इन फर्जी उद्धरणों का उपयोग अक्सर अन्य अध्ययनों में किया जाता था। इससे वैज्ञानिक समुदाय के बीच चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या एआई प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग के कारण हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक पत्रिकाओं को अपनी जांच प्रक्रिया में सुधार करने की आवश्यकता है। यह समस्या वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। वैज्ञानिक समुदाय को इस समस्या का समाधान ढूंढने की आवश्यकता है।
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