कर्नाटक हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने एक सब-इंस्पेक्टर की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला एक वकील के साथ मारपीट और उसे लात मारने से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने न केवल याचिका खारिज की, बल्कि आरोपी अधिकारी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह जुर्माना अदालत के पिछले आदेश को छिपाने के कारण लगाया गया है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने पहले ही इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। अधिकारी ने इस आदेश को नजरअंदाज करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन करने वाले अधिकारियों से इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। यह निर्णय कानून प्रवर्तन एजेंसियों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। अदालत की यह टिप्पणी पुलिस बल के लिए एक कड़ा संदेश है। कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अब सख्ती बरती जा रही है। इस जुर्माने से पीड़ित वकील को भी न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
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