लुधियाना के खन्ना निवासी तरसेम भारद्वाज ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और पहचान के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। तरसेम, जो कभी धूम्रपान भी नहीं करता, तब स्तब्ध रह गया जब आर्म्स लाइसेंस के लिए डोप टेस्ट करवाते समय पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उसे नशेड़ी दिखाया गया है। उसके नाम पर एक निजी नशा मुक्ति केंद्र से नशा छुड़ाने वाली 98 बुप्रेनॉरफिन गोलियां जारी की गई हैं, जिसका उसने कभी सेवन ही नहीं किया। पीड़ित का दावा है कि उसके [Aadhaar Redacted] का किसी ने गलत इस्तेमाल किया है। डोप टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बावजूद, पुलिस और प्रशासन के पास शिकायत करने के महीनों बाद भी मामले की जांच अधूरी है। यह मामला व्यक्तिगत पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग और नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
Source: Source