लुधियाना नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। अधिकारियों पर करीब 27-28 वर्षों से लंबित 43 करोड़ रुपये से अधिक की राशि नहीं वसूलने का आरोप है। यह राशि पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 की धाराओं 269 और 270 के तहत काटे गए चालानों से संबंधित है। आरोप है कि लंबे समय तक वसूली नहीं होने से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। मामला आरटीआई कार्यकर्ता रोहित सभ्रवाल द्वारा नगर निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों की जांच के बाद सामने आया। बिल्डिंग चालान मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों में 1999-2000 से लंबित राशि लगातार बढ़ती दिखाई गई है। इससे अधिकारियों की कथित लापरवाही और संदिग्ध कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। नगर निगम के म्युनिसिपल बाय-लॉज में लंबित वसूली राशि पर ब्याज लगाने का प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद आरोप है कि अधिकारियों ने मूल बकाया राशि की वसूली के लिए भी प्रभावी कदम नहीं उठाए। इस मामले को लेकर स्थानीय निकाय विभाग पंजाब के चीफ विजिलेंस अफसर के पास शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत में पूरे मामले की विजिलेंस जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
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