आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी ने कहा है कि वैश्विक क्रिकेट की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से भारतीय बाजार पर निर्भर है। उनका दावा है कि भारत की भागीदारी के बिना इंटरनेशनल क्रिकेट, चाहे वह फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम ही क्यों न हो, पूरी तरह अधूरा है। ललित मोदी ने सुझाव दिया कि क्रिकेट को फुटबॉल के सफल मॉडल से प्रेरणा लेनी चाहिए, जहां क्लब-आधारित प्रतियोगिताएं हावी हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के प्रमुख टूर्नामेंट हर चार साल में होने चाहिए, न कि दो-तीन साल में। उन्होंने कहा कि भारत के बिना दुनिया में कहीं भी क्रिकेट नामुमकिन है, और अगर भारत आज क्रिकेट छोड़ दे, तो खेल को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा। ललित मोदी ने यह बयान तब दिया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बन चुका है। उनके इस बयान से क्रिकेट जगत में नई बहस छिड़ गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर अत्यधिक निर्भरता खेल के लिए दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ नहीं है, जबकि कुछ मोदी की बातों से सहमत भी हैं।
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