रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद हादसे से बचे लोगों की मुश्किलें समाप्त नहीं होतीं। कई सर्वाइवर्स को घटना की यादें लंबे समय तक परेशान करती हैं। उन्हें डर, तनाव और बेचैनी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ लोग सामान्य जीवन में लौटने में कठिनाई महसूस करते हैं। हादसे के दौरान देखे गए दृश्य बार-बार याद आ सकते हैं। कई बार नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। परिवार और करीबी लोगों का भावनात्मक सहयोग उनके लिए अहम होता है। विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक आघात से उबरने में समय लग सकता है। कुछ सर्वाइवर्स को पेशेवर काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता की जरूरत पड़ती है। राहत और बचाव अभियान के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां भी उनके सामने बनी रह सकती हैं। ऐसे लोगों की लंबे समय तक निगरानी और सहायता से उन्हें सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सकती है।
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