होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित रुकावटों ने एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत, चीन और अन्य देशों के लिए सस्ता और विश्वसनीय तेल व गैस हासिल करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल की खरीद कई देशों द्वारा जारी है। इस तेल की आपूर्ति अक्सर तथाकथित ‘डार्क फ्लीट’ या ‘जॉम्बी’ जहाजों के माध्यम से की जाती है। ये जहाज अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए पहचान और ट्रैकिंग प्रणालियों का सीमित उपयोग कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जहाज सुरक्षा और पर्यावरणीय जोखिम बढ़ाते हैं। कई पुराने और कम निगरानी वाले पोत वैश्विक समुद्री मार्गों पर सक्रिय हैं। इनके संचालन को लेकर पारदर्शिता की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है। ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण खरीदार देश इन जोखिमों के बावजूद रूसी तेल में रुचि दिखा रहे हैं। कंपनियां लागत बचाने और आपूर्ति बनाए रखने को प्राथमिकता दे रही हैं। हालांकि समुद्री दुर्घटनाओं और प्रतिबंधों के उल्लंघन की आशंकाएं बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन जहाजों की निगरानी और नियमन को लेकर बहस तेज हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। यह मुद्दा वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।
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