राजधानी रायपुर के जीई रोड पर स्थित बहुचर्चित स्काईवॉक परियोजना पिछले छह वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिसे अब पुराने उपकरणों के सहारे पूरा करने की तैयारी की जा रही है। परियोजना के लिए खरीदे गए लिफ्ट और एस्केलेटर लंबे समय से स्टोरेज या खुले में पड़े हैं, जिसके कारण इनके तकनीकी रूप से सुरक्षित होने पर सवाल उठ रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग ने इन उपकरणों को फिट करने के लिए 92 लाख रुपये के दो टेंडर जारी किए, लेकिन किसी भी कंपनी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। अब विभाग तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का मानना है कि कंपनियों को प्रस्तावित राशि कम लग रही है, जिसके कारण वे काम लेने में संकोच कर रही हैं। गौरतलब है कि 2016-17 में शुरू हुई इस परियोजना की लागत 42.55 करोड़ रुपये से बढ़कर 77 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। पहले 12 स्थानों पर एस्केलेटर लगाने का प्लान था, जिसे घटाकर अब आठ कर दिया गया है। फिलहाल, 37.75 करोड़ रुपये का नया कार्यादेश जारी किया गया है और इसे 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि इसमें आठ महीने की देरी की आशंका जताई जा रही है। जानकारों के अनुसार, बिना व्यापक जांच और प्रमाणन के इतने पुराने इलेक्ट्रो-मैकेनिकल उपकरणों का उपयोग करना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है। अब विभाग इन उपकरणों के रखरखाव के लिए अलग से एएमसी (वार्षिक अनुरक्षण अनुबंध) करने की भी तैयारी कर रहा है।
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