रायपुर की सफाई व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था में शहर को चार जोन में बांटकर सफाई का ठेका दिया जाएगा। यह सिस्टम नवंबर से लागू होने की संभावना है। फिलहाल 70 वार्डों में 70 से अधिक एजेंसियां सफाई का काम कर रही हैं। नई व्यवस्था में ग्रामीण, उत्तर, दक्षिण और पश्चिम जोन के लिए सीमित एजेंसियां जिम्मेदार होंगी। इससे सफाई व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही तय करना आसान होगा। पहली बार सफाई व्यवस्था की डिजिटल मैपिंग कर निगरानी की जाएगी। ठेका एजेंसियों द्वारा बताए गए कर्मचारियों की वास्तविक संख्या और मैदान में उनकी मौजूदगी भी जांची जाएगी। कचरा उठाने वाले वाहनों और उनके रूट को भी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की तैयारी है। डिजिटल मैप पर सफाई क्षेत्र, कचरा कलेक्शन प्वाइंट, सड़क, चौराहे, ड्रेनेज और पार्क चिन्हित किए जाएंगे। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कब और कितना काम हुआ। राजधानी में सफाई, कचरा प्रबंधन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर सालाना करीब 550 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य खर्च के साथ काम, कर्मचारियों, संसाधनों और जिम्मेदारियों की एकीकृत निगरानी करना है। नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि डिजिटल तकनीक से पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य रायपुर के हर क्षेत्र में नियमित और गुणवत्तापूर्ण सफाई सुनिश्चित करना है।
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