राजस्थान में पिछले दो वर्षों के दौरान कीटनाशकों के संपर्क में आने से 535 किसानों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। इस आंकड़े ने कृषि क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और जागरूकता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार खेतों में रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग के दौरान कई किसानों की जान गई। प्रभावित परिवारों को मुआवजे के रूप में कुल 5.1 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। हालांकि मुआवजा राशि के वितरण में असमानताओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच और परीक्षण के दौरान 189 कीटनाशक नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इससे बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को सुरक्षित उपयोग के बारे में पर्याप्त प्रशिक्षण और जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है। सुरक्षात्मक उपकरणों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भी मांग की जा रही है। कृषि क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने कीटनाशकों के नियमन को और सख्त बनाने की आवश्यकता बताई है। साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण और नियमित निरीक्षण को मजबूत करने की मांग उठी है। अधिकारियों से व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम लागू करने का आग्रह किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह मामला किसानों के स्वास्थ्य और कार्यस्थल सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, निगरानी और प्रभावी नीतियों के जरिए इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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