चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को प्रदेश में ‘पेपरलेस रजिस्ट्री’ व्यवस्था के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत कर दी है। सरकार का दावा है कि इस डिजिटल प्रणाली से रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रिया अब पूरी तरह पारदर्शी और सरल हो गई है, जिससे नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। हालांकि, सरकारी दावों के बावजूद, किसानों के लिए ‘तकसीम’ (जमीन का विभाजन या बंटवारा) की प्रक्रिया अब भी एक बड़ी और जटिल समस्या बनी हुई है। किसानों का कहना है कि जहां पंजीकरण प्रक्रिया आसान हुई है, वहीं जमीन के आपसी बंटवारे और पैमाइश से जुड़े मामलों में उन्हें आज भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने इस नई डिजिटल पहल के जरिए राजस्व विभाग की सेवाओं में बिचौलियों की भूमिका खत्म करने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का वादा किया है। इस दूसरे चरण में ऑटो इंतकाल और अन्य ऑनलाइन सेवाओं को जोड़कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। राजस्व सुधारों की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकसीम जैसे विवादों का समाधान किसानों की मुख्य प्राथमिकता है।
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