उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी रणनीतियों पर काम शुरू कर दिया है। राज्य की राजनीति में एक बार फिर हिंदुत्व प्रमुख मुद्दों में उभरता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आक्रामक राजनीतिक तेवरों के साथ सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा ‘हार्ड हिंदुत्व’ की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी अपनी राजनीतिक लाइन को नए तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। माना जा रहा है कि वह ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के जरिए व्यापक मतदाता वर्ग तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं। दोनों दलों की रणनीतियां आगामी चुनाव को देखते हुए तैयार की जा रही हैं। भाजपा अपने पारंपरिक समर्थक आधार को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। वहीं समाजवादी पार्टी हिंदुत्व और सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक गतिविधियों और बयानों से चुनावी माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है। आने वाले महीनों में धार्मिक, सामाजिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर बहस और तेज होने की संभावना है। प्रदेश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियों के साथ मैदान में उतर रही हैं। उत्तर प्रदेश का आगामी चुनाव राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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