देश के युवाओं में पारंपरिक नशों के अलावा एक नए प्रकार के नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सा भाषा में इन्हें न्यू साइकोएक्टिव सब्सटेंसेज़ (NPS) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये पदार्थ मस्तिष्क और व्यवहार पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। दिल्ली के एम्स स्थित नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के विशेषज्ञों ने इस बढ़ती प्रवृत्ति को चिंता का विषय बताया है। बताया गया कि कई युवा जिज्ञासा, रोमांच और साथियों के दबाव के कारण इन पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं। शुरुआत में इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित समझा जाता है, लेकिन इनके दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं। इन पदार्थों के सेवन से मानसिक स्वास्थ्य, निर्णय क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार इनके रासायनिक घटकों की सही जानकारी भी उपलब्ध नहीं होती। इससे इनके जोखिम और बढ़ जाते हैं। युवाओं और अभिभावकों को ऐसे पदार्थों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी गई है। समय रहते पहचान और उपचार से गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है। विशेषज्ञों ने नशे की रोकथाम के लिए शिक्षा, जागरूकता और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।
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