युगांडा में मीडिया की स्वतंत्रता पर एक बड़ा प्रहार हुआ है। देश के सैन्य प्रमुख ने तत्काल प्रभाव से दो प्रमुख मीडिया संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद भारी संख्या में सैन्य कर्मियों को मीडिया कार्यालयों के बाहर तैनात कर दिया गया है। गौरतलब है कि राष्ट्रपति के बेटे ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि वे स्वतंत्र प्रेस में विश्वास नहीं रखते हैं, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। इस घटना से देश में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मीडिया संस्थानों के बंद होने से वहां काम करने वाले पत्रकारों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना हो रही है। फिलहाल कार्यालयों को पूरी तरह से सैन्य नियंत्रण में ले लिया गया है। इस कदम को सरकार द्वारा मीडिया की आवाज दबाने के एक सुनियोजित प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। मामले पर आगे की जानकारी और प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा रहा है।
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