मैसूर विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के 116 छात्रों के लिए छात्रवृत्ति से जुड़ी समस्या का समाधान किया गया है। समाज कल्याण विभाग और यूनिवर्सिटी ऑफ मैसूर को छात्रवृत्ति का खर्च बराबर-बराबर उठाने के निर्देश दिए गए हैं। इस फैसले से सभी पात्र छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित हो सकेगा। पहले फंड की कमी के कारण छात्रों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था। अब दोनों संस्थान मिलकर छात्रों की शिक्षा जारी रखने में मदद करेंगे। इस पहल का उद्देश्य वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़ना है। अधिकारियों ने पात्र छात्रों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। छात्रवृत्ति व्यवस्था से विद्यार्थियों को फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों में राहत मिलेगी। इस निर्णय से प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विश्वविद्यालय प्रशासन और विभाग आगे भी ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए समन्वय बनाए रखेंगे।
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