दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद के बाद अब मुंबई का चर्चित ब्रीच कैंडी क्लब चर्चा में आ गया है। दक्षिण मुंबई स्थित इस औपनिवेशिक दौर के क्लब पर नस्लीय विशिष्टता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि आजादी के दशकों बाद भी क्लब का वास्तविक नियंत्रण यूरोपीय नागरिकों के पास बना हुआ है। क्लब के ट्रस्ट और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे समानता और भारतीय अधिकारों के खिलाफ बताया है। मामला सामने आने के बाद सोशल और राजनीतिक स्तर पर चर्चा बढ़ गई है। क्लब की सदस्यता और प्रशासनिक नियमों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे नियम आधुनिक भारत की भावना के विपरीत हैं। दिल्ली जिमखाना क्लब पर सरकारी कार्रवाई के बाद अब ब्रीच कैंडी क्लब भी जांच और निगरानी के दायरे में आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि औपनिवेशिक दौर की व्यवस्थाओं की समीक्षा जरूरी है। क्लब प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले ने देश में संस्थागत समानता और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई सामाजिक संगठनों ने इस विषय पर हस्तक्षेप की मांग की है। आने वाले समय में इस मामले पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
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