कलेक्टर कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान बार-बार वॉशरूम जाने वाले अधिकारियों की बढ़ती संख्या ने प्रशासनिक अधिकारियों को हैरान कर दिया। इस स्थिति से नाराज होकर कमिश्नर ने मौके पर ही सभी का ब्लड शुगर टेस्ट कराने का फैसला लिया। जांच के परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे, जिसमें 16 अधिकारी ‘साइलेंट किलर’ मानी जाने वाली डायबिटीज (मधुमेह) से पीड़ित पाए गए। इस घटना ने अधिकारियों के बीच स्वास्थ्य को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। प्रशासनिक व्यस्तता और तनावपूर्ण जीवनशैली के कारण अधिकारियों में बढ़ती बीमारियों के प्रति जागरूकता लाने के लिए अब स्वास्थ्य शिविरों और नियमित चेकअप पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियंत्रित खान-पान के कारण कम उम्र में ही डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है। यह मामला एक सबक के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल प्रशासन बल्कि आम जनता को भी अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने का संदेश मिला है।
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