कर्नाटक के बेलगावी जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के लिए एक बड़े पैमाने पर मियावाकी वन परियोजना की शुरुआत की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य कम समय में घने जंगलों को विकसित करके स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है। जापानी तकनीक ‘मियावाकी पद्धति’ का उपयोग करके खाली और बंजर पड़ी जमीनों को मिनी जंगलों में तब्दील किया जा रहा है। इस अनूठी तकनीक की मदद से रोपे गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और तीस गुना ज्यादा घने होते हैं। प्रशासन ने इस बड़े अभियान के लिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में विभिन्न सरकारी जमीनों और पार्कों को चिन्हित किया है। इन मियावाकी वनों को उगाने के लिए केवल स्थानीय प्रजातियों के पौधों का ही चयन किया जा रहा है ताकि वे यहां के वातावरण में आसानी से पनप सकें। यह परियोजना शहर के बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और कंक्रीट के जंगलों के बीच ऑक्सीजन हब बनाने में बेहद मददगार साबित होगी। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ वन विभाग और विभिन्न पर्यावरण संस्थाएं इस ग्रीन प्रोजेक्ट को सफल बनाने में जुटी हुई हैं। इस मियावाकी मॉडल से न केवल हरियाली बढ़ेगी बल्कि स्थानीय जैव विविधता और पक्षियों व कीट-पतंगों को भी नया ठिकाना मिलेगा। शुरुआती चरण में रोपे गए इन पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के लिए आधुनिक ड्रिप सिस्टम और उचित बाड़ लगाने की व्यवस्था भी की जा रही है। जिला अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना आने वाले सालों में बेलगावी के गिरते भूजल स्तर को सुधारने और तापमान को नियंत्रित करने में मील का पत्थर साबित होगी। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से भी इस मियावाकी वन परियोजना का हिस्सा बनने की पुरजोर अपील की है।
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