मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट पर भाजपा के अचानक उम्मीदवार उतारने के फैसले ने कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा दी है। इस कदम से विपक्षी खेमे में विधायकों की खरीद-फरोख्त का डर पैदा हो गया है। कर्नाटक में स्थिति स्पष्ट रही, जहां मल्लिकार्जुन खड़गे, मंसूर अली खान और पवन खेड़ा निर्विरोध चुन लिए गए, वहीं भाजपा के एम. नागराज भी निर्विरोध चुने गए। कर्नाटक में एक स्वतंत्र उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के कारण वहां की चुनावी प्रक्रिया सुगम हो गई थी। इसी तरह राजस्थान में भी राज्यसभा चुनाव बिना किसी बड़े उलटफेर के संपन्न हो गए। हालांकि, मध्य प्रदेश की चुनावी रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कांग्रेस अपनी रणनीतियों को सुरक्षित करने के लिए सतर्कता बरत रही है। भाजपा का यह दांव आगामी विधानसभा और लोकसभा समीकरणों के मद्देनजर देखा जा रहा है। राज्यसभा की सीटों के लिए जारी इस जोड़-तोड़ की राजनीति ने चुनावी माहौल को दिलचस्प बना दिया है। फिलहाल, पार्टियां अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटी हैं। मामले में आगे की राजनीतिक हलचल पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
Source: Source