भारत सरकार के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने कहा है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ती तेल की कीमतों जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ‘सतर्क लचीलापन’ दिखा रही है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र अभी भी मजबूत स्थिति में हैं। विदेशी मुद्रा भंडार भी एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है। हालांकि, थोक मूल्यों में तेजी के कारण महंगाई की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर मानसून ग्रामीण मांग और विकास के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकता है। डीईए का कहना है कि सरकार ने मूल्य स्थिरता और विकास को संतुलित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक और सरकार मिलकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अभी भी बाहरी झटकों को झेलने की क्षमता है, लेकिन आगे की राह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। सरकार ने कहा है कि अगले कुछ महीनों में वैश्विक घटनाक्रम पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
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