भारत में अब मधुमेह के मरीजों के लिए सप्ताह में एक बार लगने वाला नया इंसुलिन विकल्प उपलब्ध हो गया है। इससे रोजाना इंजेक्शन लगाने की जरूरत कम होकर साल में केवल 52 इंजेक्शन तक सीमित हो सकती है। डॉक्टर इसे मधुमेह उपचार में एक महत्वपूर्ण प्रगति मान रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि यह पारंपरिक इंसुलिन का पूर्ण विकल्प नहीं है। यह दवा मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए उपयुक्त है जिन्हें बेसल इंसुलिन की आवश्यकता होती है। मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर ही इसका उपयोग तय किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कुछ मरीजों के लिए उपचार को आसान बनाया जा सकेगा। साथ ही मधुमेह के इलाज में अन्य आधुनिक दवाएं भी इंसुलिन की जरूरत को कम करने में मदद कर रही हैं। इसलिए हर मरीज के लिए एक ही उपचार उपयुक्त नहीं माना जा सकता। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि इस नई दवा का उपयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह और उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद ही किया जाना चाहिए।
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