भारत में बढ़ती गर्मी, गर्म रातें और आर्द्रता से लोगों की सेहत पर भारी असर पड़ रहा है। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि पांच दिनों के लू के झटके से पूरे भारत में लगभग 30,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यह आंकड़ा आधिकारिक हीटस्ट्रोक से होने वाली मौतों के रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में केवल अस्पतालों में दर्ज हीटस्ट्रोक के मामलों को ही मौत का कारण माना जाता है। जबकि गर्मी से दिल का दौरा, किडनी फेलियर और सांस की बीमारियों से भी मौतें होती हैं, जिन्हें आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता। इस तरह सही मौतों का आंकड़ा सामने नहीं आ पाता। शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ती गर्मी के खतरे को कम करके आंका जा रहा है। सरकार को मौतों की सही गणना के लिए बेहतर प्रणाली बनानी चाहिए। गर्मी से बचाव के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और शीतलन केंद्रों की जरूरत है।
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