भारत के कई बड़े शहरों में फुटपाथों पर वाहनों के कब्जे की समस्या बढ़ती जा रही है। पैदल चलने वालों के लिए बनाए गए रास्तों पर दोपहिया वाहन और डिलीवरी राइडर आवाजाही कर रहे हैं। इससे पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। ट्रैफिक जाम और कमजोर निगरानी व्यवस्था इस समस्या को और गंभीर बना रही है। कई लोग समय बचाने के लिए फुटपाथों को शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसका सीधा असर शहरों में पैदल चलने की संस्कृति पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी स्थिरता प्रभावित हो सकती है। पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना जरूरी है। समस्या के समाधान के लिए बेहतर शहरी योजना और सख्त नियमों की जरूरत है। प्रशासनिक निगरानी के साथ लोगों के व्यवहार में बदलाव भी आवश्यक है। फुटपाथों को दोबारा पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाने की मांग उठ रही है। शहरों में बेहतर परिवहन व्यवस्था के लिए इस मुद्दे पर ध्यान देना जरूरी है।
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