आजकल एक नई पेरेंटिंग शैली ‘बीटा मॉम्स’ के रूप में उभर रही है, जहां माताएं बच्चों पर पूर्ण नियंत्रण रखने के बजाय शांत और सहज दृष्टिकोण अपना रही हैं। पारंपरिक ‘अल्फा मॉम्स’ के विपरीत, बीटा मॉम्स बच्चों की हर गतिविधि को नियंत्रित नहीं करतीं, बल्कि उन्हें अपनी गलतियों से सीखने का अवसर देती हैं। इस शैली में माताएं बच्चों की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देती हैं और ‘परफेक्ट पेरेंटिंग’ के दबाव से मुक्त रहती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें प्रदर्शन का दबाव कम होता है। बीटा मॉम्स अक्सर अपनी भलाई का भी ध्यान रखती हैं, जिससे घर में सकारात्मक माहौल बनता है। सोशल मीडिया पर भी यह ट्रेंड काफी वायरल हो रहा है, जहां माताएं अपनी यात्रा साझा कर रही हैं। कई लोग इसे ‘रिलैक्स्ड पेरेंटिंग’ का नया नाम दे रहे हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सीमाएं तय करना भी जरूरी है। फिर भी, ‘शांति और सहजता’ का यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और आधुनिक माताओं के बीच एक स्वस्थ विकल्प के रूप में उभर रहा है।
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