विशेषज्ञों का कहना है कि बाल कल्याण बजट का मूल्यांकन केवल धन आवंटन के आधार पर नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि योजनाओं के वास्तविक परिणामों पर अधिक ध्यान देना आवश्यक है। बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में सुधार को सफलता का प्रमुख पैमाना बनाया जाना चाहिए। बजट का प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। संसाधनों का उपयोग अधिक पारदर्शी और प्रभावी ढंग से करने की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों ने जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि योजनाओं की नियमित निगरानी और मूल्यांकन होना चाहिए। इससे कमजोर वर्गों के बच्चों तक लाभ बेहतर तरीके से पहुंच सकेगा। परिणाम आधारित बजट व्यवस्था से नीतियों की प्रभावशीलता बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने सरकार से बाल कल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की अपील की है।
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