दुर्ग में छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की बंधक संपत्ति पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने एक युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि युवक ने बैंक द्वारा सीलबंद किए गए मकान का ताला दो बार तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया। यह संपत्ति 26 लाख रुपये के आवास ऋण के बदले बैंक के पास बंधक रखी गई थी। ऋण चुकता न होने पर बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन ने मार्च 2025 में पुलिस की मौजूदगी में मकान का कब्जा लेकर उसे सील कर दिया था। इसके बावजूद मृतक ऋणधारक के बेटे ने कथित रूप से ताला तोड़कर परिवार सहित मकान में रहना शुरू कर दिया। बाद में प्रशासन ने मार्च 2026 में दोबारा संपत्ति को बैंक के कब्जे में लेकर सीलबंद किया। आरोप है कि इसके बाद भी युवक ने फिर से मकान पर कब्जा कर लिया। बैंक ने संपत्ति की ई-नीलामी प्रक्रिया भी शुरू की थी, लेकिन अदालत से मिली राहत के कारण नीलामी स्थगित हो गई। निरीक्षण के दौरान बैंक अधिकारियों को सीलबंद ताले गायब मिले और कब्जे संबंधी नोटिस भी हटाए गए पाए गए। शिकायत में राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमित नामांतरण का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों और कब्जे की वैधानिक स्थिति की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
Source: Source