विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने जून में भारतीय सरकारी बॉन्ड में भारी निवेश किया है। यह निवेश करीब 4.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए फॉरेक्स सुधारों का इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इन नीतिगत कदमों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। यह आंकड़ा अब तक के किसी भी महीने के मुकाबले काफी अधिक है। इससे पहले सबसे बड़ा मासिक निवेश अगस्त 2024 में दर्ज किया गया था। उस समय निवेश लगभग 22,005 करोड़ रुपये के स्तर पर था। इस बार का निवेश उस रिकॉर्ड को भी काफी पीछे छोड़ देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। बॉन्ड बाजार में बढ़ते विदेशी प्रवाह से तरलता में सुधार की उम्मीद है। साथ ही सरकार की उधारी लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रिजर्व बैंक की नीतियों और वैश्विक परिस्थितियों ने भी इसमें भूमिका निभाई है। आने वाले महीनों में भी निवेश प्रवाह मजबूत रहने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
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