फीफा ने सिएटल में होने वाले मिस्र और ईरान के फीफा विश्व कप मुकाबले के दौरान रेनबो झंडे ले जाने की अनुमति देने का फैसला बरकरार रखा है। दोनों देशों के फुटबॉल महासंघों ने सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद फीफा ने अपने समावेशी रुख को बनाए रखने का निर्णय लिया। संगठन का कहना है कि विश्व कप सभी प्रशंसकों के लिए खुला और स्वागतयोग्य मंच है। फीफा ने स्पष्ट किया कि सभी यौन अभिरुचि और लैंगिक पहचान वाले दर्शकों का सम्मान किया जाएगा। मैच के दौरान रेनबो झंडों पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। इस फैसले को 2022 कतर विश्व कप की तुलना में नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। उस टूर्नामेंट में ऐसे प्रतीकों पर कई तरह की पाबंदियां और विवाद सामने आए थे। इस बार फीफा ने समावेशिता को अपनी प्राथमिकता बताया है। फैसले ने खेल और सामाजिक मुद्दों पर नई बहस को जन्म दिया है। समर्थकों ने इसे समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं कुछ पक्षों ने सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया है.
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