गुजरात हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मानहानि की एफआईआर को रद्द कर दिया है। उस पर व्हाट्सऐप पर एक फर्जी अखबार की खबर फॉरवर्ड करने का आरोप था। अदालत ने कहा कि केवल किसी संदेश को आगे भेज देना अपने आप में मानहानि का अपराध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आपराधिक मानहानि के मामलों की शुरुआत सामान्यतः एफआईआर से नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने मामले के आरोपों का परीक्षण करने के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता। इसी आधार पर एफआईआर को निरस्त कर दिया गया। फैसले में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया गया। अदालत ने कहा कि प्रत्येक फॉरवर्ड किए गए संदेश को स्वतः मानहानि नहीं माना जा सकता। यह निर्णय ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया की सीमाओं को स्पष्ट करने वाला माना जा रहा है। मामले में आगे की आपराधिक कार्रवाई पर भी रोक लग गई है।
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