फरीदाबाद की ऐतिहासिक बड़खल झील को दोबारा जीवंत बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन मौजूदा हालात प्रशासन और लोगों दोनों के लिए चिंता का कारण बन गए हैं। करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना के बाद झील पानी से तो भर गई है, मगर पानी की गुणवत्ता बेहद खराब दिखाई दे रही है। झील का पानी काला पड़ चुका है और आसपास बदबू का आलम ऐसा है कि लोगों का वहां रुकना तो दूर, पैदल गुजरना भी मुश्किल हो रहा है। डीसी ने पत्र लिखकर मांगी रिपोर्ट झील में फैली जलकुंभी ने इसकी खूबसूरती पर भी असर डाला है। दूर-दूर से झील देखने पहुंचने वाले लोगों को पानी की जगह हरी जलकुंभी की मोटी परत दिखाई दे रही है। हालात को देखते हुए डीसी आयुष सिन्हा ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने नगर निगम कमीश्नर धीरेंद्र खड़गटा को पत्र लिखकर झील की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। दो दशक पहले पूरी तरह सूख चुकी थी करीब दो दशक पहले पूरी तरह सूख चुकी इस झील को दोबारा विकसित करने का फैसला राज्य सरकार ने लिया था। इसके तहत झील में पानी भरने, सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की योजना बनाई गई। कई बार तय समयसीमा बढ़ने के बाद भी परियोजना अभी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी है। पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल झील को भरने के लिए सेक्टर-21ए स्थित एसटीपी से प्रतिदिन लगभग 10 एमएलडी ट्रीटेड पानी छोड़ा जा रहा है। पानी की मात्रा तो पर्याप्त रही, लेकिन उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी से लगातार दुर्गंध आ रही है और इसका रंग भी गहरा काला हो चुका है। जलकुंभी बनी बड़ी चुनौती विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी तेजी से फैलने वाला जलीय पौधा है, जो पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम कर देता है। इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर असर पड़ता है। साथ ही यह पानी के प्रवाह को भी प्रभावित करता है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती झील से जलकुंभी हटाने और पानी को साफ करने की है, ताकि बड़खल झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का सपना पूरा हो सके।
Source: Source