बिहार के एक साधारण किसान परिवार के बेटे ने कठिन परिस्थितियों और शारीरिक अक्षमता के बावजूद असाधारण सफलता हासिल की है। बचपन से ही पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उसने अपने हौसले को कमजोर नहीं होने दिया। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बीच भी उसने लगातार पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित रखा। संघर्ष और मेहनत के दम पर उसने अपने सपनों को साकार किया। अब उसे प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश मिल गया है। उसकी यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर उसने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। शिक्षक और स्थानीय लोग उसकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं। उसकी कहानी यह संदेश देती है कि इच्छाशक्ति से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
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