जिला प्रशासन और माइनिंग विभाग की कार्रवाई का खौफ रेत तस्करों में नहीं है। इसका जीता-जागता सबूत छिंदनार क्षेत्र में देखने मिल रहा है। कुछ ही दिन पहले हुई विभागीय कार्रवाई को ठेंगा दिखाते हुए तस्करों ने जीवनदायिनी इंद्रावती नदी के बीचों-बीच दोबारा मिट्टी की अस्थायी सड़क खड़ी कर दी है, ताकि भारी वाहन सीधे नदी के भीतर घुसकर धड़ल्ले से रेत की चोरी कर सकें। यही नहीं, मेन रोड के बजाय चोरी-छिपे इंद्रावती तक हाईवा समेत रेत परिवहन करने वाली दूसरी गाड़ियों को पहुंचाने और रेत चुराकर भागने के लिए नजदीकी जंगल के कई पेड़ों को काटकर रास्ता भी तैयार किया गया है। सूत्रों की मानें तो रेत तस्करों ने प्रशासनिक कार्रवाई से बचने सोची-समझी और शातिर रणनीति अपनाई है। सबसे पहले प्रशासन और आम लोगों की नजरों से बचने घने जंगलों के बीच से पेड़ों को छीलकर एक अस्थायी रास्ता तैयार किया जाता है। इस गुप्त रास्ते के जरिए रेत से लोड होने वाली भारी गाड़ियां सीधे नदी के किनारे तक पहुंचती हैं। इसके बाद नदी के भीतर धड़ल्ले से टनों मिट्टी डालकर हाईवा और ट्रैक्टरों के सीधे परिचालन के लिए एक मजबूत रैंप या पुल बना दिया जाता है। इंद्रावती का रूप बिगड़ा तो भुगतेंगे हम: रेत के अवैध खनन को लेकर छिंदनार और आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय आदिवासियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि इंद्रावती नदी हमारे लिए केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी अंचल की जीवन रेखा और आस्था का केंद्र है। नदी के बीचों-बीच इस तरह मिट्टी पाटने से पानी का प्राकृतिक बहाव पूरी तरह रुक रहा है। आने वाले दिनों में वॉटर लेवल गिरने की आशंका है। भारी वाहनों की वजह से नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यह सिर्फ रेत की चोरी नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण की सोची-समझी हत्या है। ग्रामीणों ने प्रशासन और माइनिंग विभाग से मांग की है कि पूरे नेक्सस की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
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