विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट भारत की नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता। इस बयान के बाद नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेजों को लेकर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कोई नया नियम नहीं, बल्कि पहले से लागू कानूनी व्यवस्था है। पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 के तहत पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं माना जाता। पासपोर्ट मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। किसी व्यक्ति की नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण या क्षेत्र के भारत में विलय जैसे आधारों पर तय की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और अन्य वैध दस्तावेजों के आधार पर नागरिकता का सत्यापन किया जाता है। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट जारी होने का अर्थ स्वतः नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं है। नागरिकता से जुड़े मामलों में संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारी का निर्णय ही मान्य होता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस विषय में नीति या नियमों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। हालिया बयान का उद्देश्य केवल मौजूदा कानूनी स्थिति को स्पष्ट करना था।
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