राजिम के ग्रामीण इलाकों में रबी फसल की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने का सिलसिला जारी है। सोमवार को कई गांवों में खेतों से उठते घने धुएं के कारण प्रदूषण बढ़ गया। पाण्डुका-राजिम नेशनल हाईवे के आसपास फैले धुएं से वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दृश्यता कम होने के कारण सड़क पर सफर भी प्रभावित हुआ। कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हुईं। प्रशासन ने पहले ही किसानों से पराली न जलाने की अपील की थी। कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने पराली को खेतों में मिलाकर जैविक खाद बनाने की सलाह दी थी। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाएं जारी हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इससे मिट्टी की उर्वरता और सूक्ष्मजीवों को भारी नुकसान होता है। पराली जलाने से वायु गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। विशेषज्ञों ने किसानों को वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी है। प्रशासन अब मामले पर निगरानी बढ़ाने की बात कह रहा है।
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