कजाखस्तान की ग्रैंडमास्टर बिबिसारा अस्साउबायेवा ने अपने पहले ही नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में महिला वर्ग का खिताब जीत लिया। 22 वर्षीय खिलाड़ी को अंतिम क्लासिकल मुकाबले में केवल ड्रॉ की जरूरत थी। शुरुआती दबाव और घबराहट के बावजूद उन्होंने लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ उन्होंने यूक्रेन की अन्ना मुज़ीचुक को खिताब से बेदखल कर दिया। बिबिसारा का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में लगातार प्रभावशाली रहा। उनकी सफलता को महिला शतरंज में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। भारत की युवा खिलाड़ी दिव्या देशमुख भी खिताब की दौड़ में मजबूत दावेदार थीं। डेब्यू कर रहीं दिव्या ने कई मुकाबलों में शानदार खेल दिखाया। हालांकि निर्णायक मुकाबले में समय प्रबंधन उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ। महत्वपूर्ण क्षणों में घड़ी का दबाव उनके प्रदर्शन पर असर डाल गया। इसके चलते वह शीर्ष पुरस्कार जीतने से चूक गईं। फिर भी दिव्या का प्रदर्शन भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। नॉर्वे चेस में दोनों युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से खास पहचान बनाई।
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