नीति आयोग की बैठक में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला, जहाँ सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हिस्सा लिया और 100% उपस्थिति दर्ज की गई। कांग्रेस शासित राज्यों जैसे केरल, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना के साथ-साथ आम आदमी पार्टी शासित पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने भी इस बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए एनडीए सरकार के इस मंच पर विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों का शामिल होना एक बड़ा संकेत है। इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की भागीदारी रही। उनके इस कदम ने राज्य के पुराने कांग्रेस प्रशासन द्वारा अपनाए गए बहिष्कार के रुख को खत्म कर दिया है। यह पहली बार है जब एनडीए सरकार की इस महत्वपूर्ण बैठक में इतनी मजबूत और सर्वसम्मति वाली उपस्थिति देखी गई है। राजनीतिक विश्लेषक इसे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं। बैठक में विकास के विभिन्न मुद्दों और केंद्र-राज्य सहयोग पर चर्चा हुई। इस घटनाक्रम को देश की सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की भावना को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।
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