नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) में टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। विश्वविद्यालय ने हैदराबाद स्थित निजी कंपनी कोएम्ट (COEMPT) एजू टेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ तीन साल के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। इस आरोप की सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली में अनियमितताओं वाली इसी कंपनी की संलिप्तता के बाद जांच की मांग और तेज हो गई है। एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि कोएम्ट ने टेंडर जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज पेश किए और टेंडर की शर्तों को पूरा करने के लिए दूसरी कंपनी ‘ग्लोबेरेना’ के पिछले अनुभव को गलत तरीके से प्रस्तुत किया, जबकि दोनों कंपनियों के बीच गहरे संबंध बताए जा रहे हैं। कोएम्ट पर पहले तेलंगाना की कई यूनिवर्सिटियों द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने का भी आरोप है। कंपनी के कामकाज से साढ़े तीन लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं। शीतकालीन 2025 की परीक्षाओं में अंकपत्रों में गलत गणना और विषयों के मिलान में त्रुटियां पाई गईं। ग्रीष्मकालीन 2026 की परीक्षाओं में प्रवेश पत्र देर से जारी होने और उनमें गलत विषय दिखने जैसी दिक्कतें आईं। प्रवेश पत्र परीक्षा से 24 घंटे पहले तक जारी नहीं किए गए। छात्रों के प्रदर्शनों के बाद कुलपति ने प्रो. मनमोहन बाजपेयी की अध्यक्षता में एक तीन-सदस्यीय तथ्य-खोज समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय ने कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा है और राज्य का उच्च शिक्षा विभाग जवाब तलब कर चुका है।
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