जापान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार एक केंद्रीकृत खुफिया एजेंसी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह कदम देश की सुरक्षा जरूरतों में आए बदलावों के बीच उठाया जा रहा है। जापान को क्षेत्रीय तनाव, साइबर खतरों और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नई एजेंसी का उद्देश्य विभिन्न खुफिया सूचनाओं को एक जगह एकत्रित और बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना होगा। युद्ध के बाद जापान ने खुफिया व्यवस्था को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाया था। अब बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात ने सरकार को नई रणनीति बनाने के लिए प्रेरित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और उत्तर कोरिया से जुड़े सुरक्षा मुद्दे इस फैसले के पीछे अहम कारण हैं। नई व्यवस्था से सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसके साथ निगरानी और गोपनीयता से जुड़े सवाल भी उठ रहे हैं। जापान में इस कदम को सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
Source: Source