दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश साकेत बिल्डिंग हादसे से जुड़े एक मामले के संदर्भ में दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक या भ्रामक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से उन वीडियो को हटाने का निर्देश दिया गया है जिनमें एक जज को ‘हत्यारा’ बताया गया था। अदालत ने माना कि इस तरह की सामग्री न्यायिक प्रक्रिया और न्यायपालिका की गरिमा को प्रभावित कर सकती है। मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। इस निर्देश का उद्देश्य गलत सूचना और मानहानि को रोकना है। आगे की सुनवाई में अनुपालन रिपोर्ट मांगी जा सकती है।
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