दिल्ली विश्वविद्यालय की एक प्रोफेसर की हत्या के मामले में जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस को मिले शुरुआती सबूतों से संकेत मिल रहे हैं कि यह हत्या पहले से सुनियोजित थी। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने घटना से पहले इलाके की कई बार रेकी की थी। मामले में व्हाट्सएप कॉल और फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल के संकेत भी मिले हैं। आरोप है कि प्रोफेसर के किरायेदार उनके पैतृक घर को बेचने से इनकार किए जाने से नाराज थे। इसी विवाद ने कथित तौर पर हत्या की साजिश को जन्म दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने प्रोफेसर से 3 जून को मिलने की योजना बनाई थी। इसके बाद कथित रूप से वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि वारदात को अंजाम देने से पहले विस्तृत तैयारी की गई थी। हत्या के पीछे की पूरी साजिश और संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच जारी है। यह मामला राजधानी में सुरक्षा और भरोसे के संबंधों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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