दिल्ली में इंफ्रास्ट्रक्चर फंड चार्ज (IFC) से जुड़े मामले की जांच तेज कर दी गई है। दिल्ली जल बोर्ड ने इस संबंध में एमसीडी से पिछले पांच वर्षों के भवन रिकॉर्ड मांगे हैं। जांच का उद्देश्य उन इमारतों की पहचान करना है, जिन्होंने पानी और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क जमा नहीं किया। अधिकारियों को राजस्व नुकसान की आशंका है। रिकॉर्ड के आधार पर बकाया शुल्क की समीक्षा की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जांच में निर्माण स्वीकृति और शुल्क भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल होगी। संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। जल बोर्ड सभी मामलों की विस्तृत जांच कर रहा है। दोषी पाए जाने पर कानूनी और वित्तीय कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन का उद्देश्य राजस्व वसूली सुनिश्चित करना और अनियमितताओं पर रोक लगाना है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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