तेलंगाना हाईकोर्ट ने कृषि और पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों के शिक्षकों तथा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने संबंधी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति की आयु तय करना सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी है। न्यायालय ने कहा कि इस विषय पर निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। कोर्ट ने माना कि यह मामला प्रशासनिक और नीतिगत दायरे में आता है। इसलिए न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं हैं। याचिकाकर्ताओं ने उच्च शिक्षा और अनुभव के आधार पर आयु बढ़ाने की दलील दी थी। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। फैसले में कहा गया कि नीति निर्माण न्यायालय का नहीं बल्कि सरकार का क्षेत्राधिकार है। राज्य सरकार परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार ऐसे निर्णय ले सकती है। इस आदेश से संबंधित विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों को राहत नहीं मिल सकी। मामला शिक्षा और सरकारी सेवा नियमों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है। भविष्य में इस विषय पर कोई बदलाव करना है या नहीं, इसका निर्णय राज्य सरकार ही करेगी।
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