तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में एक गौशाला से 39 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया गया है। सभी श्रमिक छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उन्हें आकर्षक वेतन और बेहतर रोजगार का लालच देकर वहां ले जाया गया था। मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया गया। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं और स्वतंत्रता नहीं दी जा रही थी। कई सप्ताह तक उन्होंने कथित तौर पर शोषण और अभाव का सामना किया। स्थिति गंभीर होने पर मजदूरों ने साहस दिखाते हुए स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया। सूचना मिलने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों ने कार्रवाई शुरू की। जांच के दौरान श्रमिकों को बंधुआ जैसी परिस्थितियों में पाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद सभी 39 मजदूरों को सुरक्षित रूप से वहां से निकाला गया। अधिकारियों ने श्रमिकों को आवश्यक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई है। मामले की जांच जारी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन यह भी पता लगा रहा है कि श्रमिकों की भर्ती किन परिस्थितियों में की गई थी। इस कार्रवाई को श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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