अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की मजबूती लगातार आठवें कारोबारी सत्र में भी जारी रही। बुधवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 29 पैसे मजबूत होकर प्रति डॉलर 94.62 के स्तर पर पहुंच गया। रुपये में इस तेजी के पीछे विदेशी मुद्रा के प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के समर्थन को अहम माना जा रहा है। जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ से जुड़े विदेशी डॉलर निवेश ने रुपये को मजबूती देने में मदद की। विदेशी मुद्रा का बढ़ता प्रवाह घरेलू मुद्रा की मांग को समर्थन दे सकता है। RBI के हस्तक्षेप और समर्थन ने भी रुपये को सहारा दिया। लगातार आठ कारोबारी सत्रों तक रुपये में मजबूती दर्ज होना मुद्रा बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, रुपये की राह में कई चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय मुद्रा पर दबाव डाल सकती हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल और डॉलर की मांग को बढ़ा सकता है। ऐसे में आगे रुपये की चाल विदेशी निवेश, RBI की नीतियों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।
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