यमुनानगर में साइबर ठगों ने जगाधरी के अंसल टाउन निवासी और सिविल अस्पताल से रिटायर्ड डॉ. नरेंद्र छाबड़ा को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार बना लिया। ठगों ने खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताकर उन्हें डराया और कथित जांच में फंसा दिया। आरोप लगाया गया कि उनके दस्तावेजों का उपयोग देश विरोधी गतिविधियों में हुआ है। डर और दबाव बनाकर उन्हें 18 दिनों तक वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखा गया। इस दौरान उन्हें घर से बाहर न निकलने और किसी से संपर्क न करने के निर्देश दिए गए। उनका कैमरा लगातार ऑन रखने को कहा गया। मानसिक दबाव में डॉक्टर ने अपनी दैनिक गतिविधियां भी लगभग बंद कर दीं। वे और उनकी पत्नी अधिकांश समय ठगों के नियंत्रण में रहे। इस दौरान 3 जून से 18 जून के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1 करोड़ 42 लाख 9 हजार 22 रुपये ट्रांसफर कराए गए। ठगों ने धमकी देकर उन्हें लगातार पैसे भेजने के लिए मजबूर किया। बाद में संदेह होने पर उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार ठगी करने वाले नेटवर्क और आरोपियों की पहचान की जा रही है। साइबर थाना पुलिस यह भी जांच कर रही है कि रकम किन-किन खातों में भेजी गई।
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