सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि लंबे समय से टूट चुकी शादियों को अदालतों द्वारा अनावश्यक रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। कोर्ट ने ऐसे मामलों को सामाजिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से हानिकारक बताया। मामले में अदालत ने अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए 15 साल से अलग रह रहे एक डॉक्टर दंपति के विवाह को समाप्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विवाह केवल एक कानूनी अनुबंध नहीं है, बल्कि आपसी सम्मान और जिम्मेदारी पर आधारित साझेदारी है। लंबे समय तक चलने वाले विवादित संबंध दोनों पक्षों के लिए मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। अदालत ने यह भी माना कि ऐसे रिश्तों को बनाए रखना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। इस फैसले को वैवाहिक कानूनों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को भी ऐसे मामलों में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। यह निर्णय विवाह विवादों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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