पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के टांगड़ा स्थित कार्यालय से कई लोगों के आधार, वोटर और राशन कार्ड मिलने का मामला सामने आया है। यह बरामदगी स्थानीय प्रशासन या पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुई। कार्डों की संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार ये दर्जनों में हैं। विपक्षी दलों ने इसपर सवाल उठाए हैं कि चुनावी पहचान और राशन से जुड़े ये गोपनीय दस्तावेज राजनीतिक दफ्तर में कैसे पहुंचे। आशंका जताई जा रही है कि इन कार्डों का इस्तेमाल फर्जी वोटिंग, सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा सकता था। टीएमसी ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह उनके खिलाफ साजिश का हिस्सा है। हालांकि, प्रशासन ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि कार्ड असली हैं या फर्जी और इनका मूल स्वामी कौन है। साथ ही, इन कार्डों को बनाने या इकट्ठा करने में किसी सरकारी कर्मचारी की मिलीभगत थी या नहीं। घटना से वंचित और गरीब तबकों में भी असंतोष है, जिनके राशन और आधार कार्ड गायब पाए गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी साल में इस मामले के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। केंद्रीय एजेंसियों के हस्तक्षेप की भी मांग उठी है। फिलहाल, टीएमसी नेतृत्व इस मामले पर सफाई पेश करने की जल्दबाजी नहीं दिखा रहा है। पुलिस ने कार्यालय के कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की है और आगे की कार्रवाई जारी है। यह पूरा मामला राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर गया है।
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