झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव बेहद रोमांचक मोड़ पर आ गए हैं। ‘इंडिया’ गठबंधन, जिसके पास 56 विधायकों का आंकड़ा है, दो सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की रणनीति गठबंधन के भीतर सेंधमारी करना और क्रॉस-वोटिंग को बढ़ावा देना है। अतीत में बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में हुए चुनावों के चौंकाने वाले नतीजों को देखते हुए, ‘इंडिया’ गठबंधन के सामने अपने विधायकों को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है। यदि गठबंधन में फूट पड़ती है, तो चुनावी परिणाम समीकरणों को पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल, सभी राजनीतिक दलों की नजरें विधायकों के रुख पर टिकी हुई हैं। यह चुनाव न केवल सीटों के लिहाज से बल्कि गठबंधन की एकजुटता की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या ‘इंडिया’ अपने वोट बैंक को सुरक्षित रख पाएगा या भाजपा अपनी रणनीति में सफल होगी। राज्य की राजनीति में यह चुनाव एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।
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