प्रसिद्ध सितार वादक पूर्वायन चटर्जी का मानना है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत को युवा पीढ़ी के लिए अधिक प्रासंगिक और आकर्षक बनाना जरूरी है। हाल ही में कोलकाता में आयोजित एक संगीत कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं की बढ़ती भागीदारी पर खुशी जताई। उनके अनुसार, जेनरेशन Z का शास्त्रीय संगीत की ओर बढ़ता रुझान इसके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। कार्यक्रम में उनके साथ प्रख्यात बांसुरी वादक राकेश चौरसिया भी मौजूद थे। दोनों कलाकार तीन दशकों से अधिक समय से साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगीत के माध्यम से परंपरा और आधुनिकता के बीच संवाद स्थापित करना आवश्यक है। पूर्वायन का मानना है कि शास्त्रीय संगीत की जड़ों को बनाए रखते हुए नई पीढ़ी से जुड़ने के प्रयास किए जाने चाहिए। कलाकारों ने संगीत को लोगों तक पहुंचाने के लिए नए प्रयोगों और संवाद की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परंपरा को संरक्षित रखते हुए नए श्रोताओं को जोड़ना समय की मांग है। पूर्वायन चटर्जी ने यह भी कहा कि यदि सही अवसर मिला तो वह गायन के क्षेत्र में भी कदम रखने के लिए तैयार हैं। दोनों कलाकार भारतीय शास्त्रीय संगीत को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
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