भारत सरकार ने स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए छोटे जलविद्युत परियोजनाओं हेतु नई दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 2,585 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों में 1,500 मेगावाट अतिरिक्त ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करना है। योजना के तहत 25 मेगावाट तक की क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों को इस पहल से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। छोटे जलविद्युत संयंत्र पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत माने जाते हैं और इनका कार्बन उत्सर्जन अपेक्षाकृत कम होता है। योजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली उपलब्धता में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार स्वच्छ और सतत ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार छोटे जलविद्युत परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। नई नीति से निजी और सार्वजनिक निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। यह पहल देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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